जब कोई वस्तु दो विमाओं (Two Dimension) गति करती है, तो वस्तु की यह गति समतल (Plane) में गति कहलाती है |
जैसे- प्रक्षेप्य गति तथा वृत्तीय गति समतल में गति के उदाहरण है |
प्रक्षेप्य गति (Projectile Motion) :- जब किसी पिण्ड को नियत प्रारम्भिक वेग से, उर्ध्वाधर दिशा से भिन्न दिशा में फेका जाता है, तो वह गुरुत्वीय त्वरण के अन्तर्गत उर्ध्वाधर तल (Vertical Plane) में वक्र पथ पर गति करता है, जिसे प्रक्षेप्य गति कहते हैं तथा पिण्ड द्वारा तय किए गए पथ को प्रक्षेप्य पथ (Trajectory) कहते हैं |
प्रक्षेप्य गति के सूत्र (Formulae of Projectile Motion)
(i) प्रक्षेप्य के घटक (Component of Projectile) ⇒ चित्रानुसार ux = u cosθ तथा uy = u sinθ प्रक्षेप्य के घटक है |
(ii) चढ़ाव का समय (Time of Ascent) :- प्रक्षेप्य गति करती हुई कोई वस्तु अपने उच्चतम बिन्दु तक पहुँचने में जितना समय लेती है, उसे उस वस्तु का चढ़ाव का समय कहते हैं | इसे ta से व्यक्त करते हैं |
$\Rightarrow {{t}_{a}}=\frac{u\sin \theta }{g}......(1)$
(iii) ढलान का समय (Time of Descent) :- प्रक्षेप्य गति करती हुई कोई वस्तु अपने उच्चतम बिन्दु से नीचे आने में जितना समय लेता है, उसे उस वस्तु का ढलान का समय कहते हैं | इसे td से व्यक्त करते हैं |
$\Rightarrow {{t}_{d}}=\frac{u\sin \theta }{g}........(2)$
सूत्र (1) व (2) से स्पष्ट है कि चढ़ाव का समय (ta) ढलान के समय (td) के बराबर होता है |
(iv) प्रक्षेप्य का उड्डयन काल (Time of Flight of Projection)- वस्तु को प्रक्षेपित करने तथा उसके वापस पृथ्वी पर लौटकर आने के बीच जितना समय लगता है, उसे प्रक्षेप्य का उड्डयन काल कहते हैं | इसे ‘T’ से प्रदर्शित करते हैं |
अतः प्रक्षेप्य (पिण्ड या वस्तु) का उड्डयन काल –
$T={{t}_{a}}+{{t}_{d}}$
$=\frac{u\sin \theta }{g}+\frac{u\sin \theta }{g}$
$\left[ T=\frac{2u\sin \theta }{g} \right]$
(v) प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई (Maximum height of Projectile) ⇒ प्रक्षेपण के दौरान वस्तु जिस अधिकतम उर्ध्वाधर ऊँचाई तक जाता है, उसे प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई कहते हैं | इसे ‘h’ अथवा ‘H’ से प्रदर्शित करते हैं |
$\left[ h=\frac{{{u}^{2}}{{\sin }^{2}}\theta }{2g} \right]$
(vi) प्रेक्षेप्य का परास (Range of a Projectile) :- प्रक्षेप्य वस्तु अपने उड्डयन काल में जितनी क्षैतिज दूरी तय करता है, उसे उसका प्रक्षेप्य का परास या क्षैतिज परास कहते हैं | इसे ‘R’ से प्रदर्शित करते हैं |
$\left[ R=\frac{{{u}^{2}}\sin 2\theta }{g} \right]$
एक समान वृत्तीय गति (Uniform Circular Motion) :- जब कोई कण एक निश्चित बिन्दु के परितः अचर चाल (Constant Speed) से एक वृत्तीय पथ पर चलता है, तो उसकी गति एक समान वृत्तीय गति कहलाती है |
उदाहरण-(i) ⇒ सूर्य के चारो-ओर पृथ्वी की गति
(ii) ⇒ नाभिक के चारो ओर इलेक्ट्रान की गति
वृत्तीय गति से जुड़े कुछ पद ⇒
1-कोणीय विस्थापन (Angular Displacement) :- किसी समयान्तराल में कण के त्रिज्य-वेक्टर द्वारा तय किया गया कोण उस कण का कोणीय विस्थापन कहलाता है | कोणीय विस्थापन एक सदिश राशि है तथा इसका मात्रक रेडियन होता है |
2-कोणीय वेग(Angular Velocity) :- वृत्तीय गति करते हुए कण के कोणीय विस्थापन की दर को कोणीय वेग कहते हैं |इसे ω (ओमेगा) से प्रदर्शित करते हैं | यह एक सदिश राशि है | इसका मात्रक रेडियन/सेकेण्ड होता है |
3- कोणीय त्वरण (Angular Acceleration) :- कोणीय वेग परिवर्तन की दर को कोणीय त्वरण कहते हैं | इसका मात्रक रेडियन/सेकेण्ड2 होता है |
अभिकेन्द्र त्वरण (Centripetal Acceleration) :- जब कोई कण एकसमान वृत्तीय गति करता है, तो कण की चाल अचर (Constant) रहते हुए भी उसकी गति की दिशा लगातार बदलती रहती है, अर्थात् कण का वेग लगातार बदलता रहता है, अतः वृत्तीय गति करते कण पर एक त्वरण कार्य करता है, जिसकी दिशा हमेशा वृत्त के केन्द्र की ओर (त्रिज्या के अनुदिश) रहती है | इसलिए इस त्वरण को अभिकेन्द्र त्वरण अथवा त्रिज्य त्वरण कहते हैं |
अभिकेन्द्र बल (Centripetal Force) :- जब कोई कण एक समान चाल v से r त्रिज्या के वृत्तीय पथ पर गति करता है, तो उस पर एक अभिकेन्द्र त्वरण कार्य करता है, जिसका परिमाण (v2/r) अचर (Constant) रहते हुए भी उसकी दिशा लगातार बदलती रहती है, जो सदैव वृत्त के केन्द्र की ओर रहती है | न्यूटन के गति के नियमानुसार “किसी वस्तु में उत्पन्न त्वरण सदैव उस वस्तु पर लगे बल के कारण ही होता है | अतः वृत्तीय मार्ग पर गति करते हुए कण पर एक बल कार्य करता है, जिसकी दिशा वृत्त के केन्द्र की ओर रहती है | इस बल को अभिकेन्द्र बल कहते हैं |









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