Saturday, October 17, 2020

Motion in a Straight line (सीधी रेखा में गति)

 हम अपने दैनिक जीवन में हर रोज कुछ ऐसी वस्तुओं को जरूर देखते हैं,  जिनमें समय के साथ उनकी स्थिति में बदलाव दिखाई पड़ता है,  तब हम कहते हैं कि वस्तु गतिमान है | 

जैसे- निम्न चित्र में आदमी और कार समय के साथ अपनी स्थिति में परिवर्तन दिखा रहे है, अतः आदमी और कार दोनों ही गति की अवस्था में हैं |


इसके विपरीत यदि समय परिवर्तन के साथ वस्तु की स्थिति में किसी प्रकार का बदलाव नहीं है, तो वस्तु विराम अवस्था में कही जाती है | 

जैसे- निम्न चित्र में आदमी और कार दोनों ही समय के साथ अपनी स्थिति में परिवर्तन नहीं दिखा रहे हैं, इसलिए दोनों ही विराम या स्थिर अवस्था में हैं |


गति की सापेक्षता (Relativity of Motion)

क्या आपने कभी बस में या ट्रेन में यात्रा किया है, विश्वास है की आपने जरूर किया होगा | आपकी यह यात्रा गति की सापेक्षता को समझने में मदद करेगी | तो चलिए गति की सापेक्षता को समझते हैं –

जब आप ट्रेन में खिड़की वाली सीट पर बैठ कर यात्रा कर रहे थें, तो आपने जरूर इस बात को Notice किया होगा कि खिड़की के बाहर की सभी वस्तुएँ जैसे- पेड़-पौधे, मकान आदि तेजी से पीछे की ओर गति करते हुए प्रतीत हो रहे थें |


और जिस ट्रेन में आप बैठे थे वह गति करती नहीं प्रतीत हो रही थी अर्थात् ट्रेन आपको विराम अवस्था में प्रतीत हो रही थी | परन्तु सच यह है कि ट्रेन के बाहर की सभी वस्तुएँ अपनी जगह पर स्थिर  थीं बल्कि आप ट्रेन के साथ गति कर रहें थें |अब आप सोच रहे होंगे कि यह कैसे निश्चित किया जाए कि कौन-सी वस्तु स्थिर है , और कौन-सी वस्तु गतिमान | यह बिल्कुल आसान है, आप जब ट्रेन में बैठे होते हैं, तो आपके लिए बाहर स्थित सभी वस्तुएँ गतिमान होती है, आप ट्रेन के साथ अपने आपको स्थिर पाते हैं | यदि बाहर स्थित कोई व्यक्ति आपको और ट्रेन को देखता है तब उसके लिए आप ट्रेन के साथ गतिमान प्रतीत होते हैं | अतः अब यह कह सकते हैं कि किसी वस्तु की गति अथवा विरामावस्था देखने वाले अर्थात् प्रेक्षक की स्थिति पर निर्भर है जब ट्रेन में आप बैठें होते हैं, तो आपके लिए बाहर की सभी वस्तुएँ गतिमान होती है और आप स्वयं को ट्रेन के साथ स्थिर पाते हैं |

अतः स्पष्ट है कि किसी वस्तु की गतिमान अवस्था अथवा विराम अवस्था सिर्फ और सिर्फ प्रेक्षक अथवा देखनेवाले की स्थिति पर निर्भर करती है | यदि हम प्रेक्षक अर्थात् देखने वाले को एक स्थिर सन्दर्भ बिन्दु मान लें, तो सन्दर्भ बिन्दु के सापेक्ष अन्य सभी वस्तुएँ गतिमान मानी जायेंगी, यदि समय के साथ उनकी स्थिति में बदलाव हो रहा हो | अतः अब आप जरूर समझ गए होंगे कि गति को किसी न किसी के सापेक्ष ही परिभाषित किया जा सकता है | निरपेक्ष (बिना किसी सन्दर्भ बिन्दु) रूप से कहना सम्भव नहीं है कि कौन-सी वस्तु स्थिर है और कौन-सी गतिमान |

आपके प्रश्न-

प्रश्न-1 :- सर, हम जानते हैं कि पृथ्वी सूर्य के चारों-ओर घूमती है और स्वयं अपनी धूरी पर भी घूमती है, लेकिन हमें इसकी गति का आभास क्यों नहीं होता है ?

उत्तर :- बच्चों इस प्रश्न का उत्तर भी एक प्रश्न पूछ कर दिया जा सकता है, यदि हम आपसे पूछें कि जब आप ट्रेन में सफ़र कर रहे होते हैं, तो क्या आपको ट्रेन के अन्दर बैठे यात्री और सामान आपको गति करते हुए दिखायी देते हैं ? शायद आप का जवाब होगा, नहीं

लेकिन जब आप ट्रेन से बाहर देखते हैं, तो बाहर की सभी वस्तुएँ गतिमान प्रतीत होती हैं | ट्रेन के अन्दर के सभी यात्री और वस्तु स्थिर प्रतीत होती है जिसका कारण है कि जिस वेग और जिस दिशा में आप गति कर रहे हैं उसी वेग और दिशा में ट्रेन के अन्य यात्री और वस्तुएँ गति कर रहे हैं इसलिए ट्रेन के अन्दर बैठे सभी यात्री और सामान आपको विराम लगती है | ठीक उसी प्रकार पृथ्वी पर हम और आस-पास की जितनी वस्तुएँ हैं सभी एक ही वेग से गति कर रही हैं | इसलिए हमें किसी प्रकार की गति का अनुभव नहीं होता है | लेकिन यदि हम सूर्य से तुलना करें, तो हम पृथ्वी के साथ सूर्य के चारो ओर गति कर रहे हैं |



गति के प्रकार (Types of Motion)-

1- ऋजु-रेखीय गति (Rectilinear Motion) :- जब कोई वस्तु किसी ऋजुरेखीय मार्ग पर एक ही दिशा में गति करती है, तो वस्तु की गति ऋजु-रेखीय गति कहलाती है |

जैसे- ऊपर से नीचे की ओर गिरती हुई गेंद की गति-


 

2- वृत्तीय गति (Circular Motion ) :- जब कोई कण वृत्तीय पथ (Circular path) पर गति करता है, तब उसकी गति वृत्तीय गति कहलाती है |

जैसे- निम्न चित्र में कण की गति एक वृत्तीय गति है -


3- दोलन-गति (Oscillatory Motion) :- जब कोई वस्तु किसी निश्चित बिन्दु के इधर-उधर गति करती है, तो उसकी गति दोलन गति या कम्पनिक गति कहलाती है | दोलन करने वाली वस्तु का इसकी माध्य स्थिति के किसी भी ओर अधिकतम विस्थापन वस्तु का आयाम कहलाता है |

जैसे- गति करते हुए लोलक की गति-


दूरी तथा विस्थापन (Distance and Displacement)

दूरी (Distance) :- किसी गतिमान वस्तु द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में तय किए गए कुल  मार्ग की लम्बाई, वस्तु द्वारा चली गई दूरी कहलाती है |



विस्थापन (Displacement) :- किसी गतिमान वस्तु की प्रारम्भिक और अन्तिम स्थितियों के बीच की न्यूनतम दूरी को विस्थापन कहते हैं | यह एक सदिश राशि(Vector quantity) है तथा इसका S.I. पद्धति में मात्रक मीटर है |


 

चाल और वेग (Speed And Velocity)

चाल (Speed) :- किसी वस्तु की चाल उसके द्वारा तय की गयी कुल पथ-लम्बाई (Total path length) और लिए गए समय के रूप में परिभाषित (Defined) की जाती है |

चाल के प्रकार (Types of Speed) :- चाल चार प्रकार की होती हैं-

(i) एक समान चाल या स्थिर चाल (Uniform Speed or Constant Speed) :- जब कोई वस्तु समान समयान्तरालों (Equal intervals of time) में समान दूरी तय करती हैं, तो इसकी चाल एक समान चाल या स्थिर चाल कहलाती है |

(ii) असमान चाल या अस्थिर चाल (Non-uniform Speed or Variable Speed) :- जब कोई वस्तु समान समयान्तरालों में असमान दूरी तय करती है, तो यह चाल असमान चाल या अस्थिर चाल कहलाती है |

(iii) औसत चाल (Average Speed) :- किसी गतिमान वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी (Total distance traveled by object) और लिए गए कुल समय के अनुपात को औसत चाल (Average Speed) कहते हैं |



यदि अलग-अलग समयन्तराले t1, t­2, t3, t4, में तय की गयी दूरियाँ क्रमशः S1, S2, S3, S4, .... हो तब


(iv) तात्क्षणिक चाल (Instantaneous Speed) :- किसी विशेष क्षण पर वस्तु की चाल को उस वस्तु की तात्क्षणिक चाल कहते हैं |


वेग (Velocity) :- किसी वस्तु का वेग वस्तु के विस्थापन (Displacement) और विस्थापन में लगे समय के अनुपात में परिभाषित किया जाता है |

यह एक सदिश राशि है तथा इसका S.I. मात्रक m/s (मीटर/सेकण्ड) है | इसका विमीय सूत्रक [ML1T-1] है |

वेग के प्रकार (Types of Velocity) :- वेग चार प्रकार के होते हैं –

(i) एक समान वेग या अचर वेग (Uniform velocity or Constant Velocity) :- जब कोई गतिमान वस्तु समान समयान्तरालों में समान दूरी विस्थापित होती है , तो वस्तु का वेग एक समान वेग या अचर वेग कहलाता है |

(ii) असमान वेग या अस्थिर वेग (Non-uniform velocity or variable velocity) :- जब वस्तु समान समयान्तरालों में असमान दूरी विस्थापित होती है, तो इसे असमान वेग या अस्थिर वेग कहते हैं |

(iii) औसत वेग (Average Velocity) :- किसी वस्तु द्वारा किसी समय में तय किए गए कुल विस्थापन (Total displacement) तथा विस्थापन तय करने में लगे कुल समय का अनुपात वस्तु का औसत वेग कहलाता है |

(iv) तात्क्षणिक वेग (Instantaneous Velocity) :- किसी गतिशील पिण्ड का किसी निश्चित क्षण पर वेग तात्क्षणिक वेग कहलाता है |

सापेक्ष वेग (Relative Velocity) :- जब दो गतिशील वस्तुओं में से किसी एक के सापेक्ष, दूसरी वस्तु का वेग ज्ञात किया जाता है, तो उसे आपेक्षिक वेग या सापेक्ष वेग कहते हैं |

⇒यदि दो वस्तुएँ V1 व V2 वेग से एक ही दिशा में गति कर रही हो, तो सापेक्ष वेग = V- V2

⇒यदि दो वस्तुएँ V1 व V2 वेग से विपरीत दिशा में गति कर रही है, तो सापेक्ष वेग = V+ V2

त्वरण (Acceleration) :-

जब कोई वस्तु समय के साथ परिवर्तित वेग से गति करती है, तो वस्तु की गति त्वरित गति (Accelerated Motion) कहलाती है | समय के सापेक्ष इस त्वरित गति की माप को त्वरण कहते हैं | दूसरे शब्दों में कहें तो – “किसी वस्तु के वेग में परिवर्तन की समय दर को त्वरण कहते हैं |

यदि △t समयान्तराल में किसी वस्तु का वेग u से v हो जाता है, तब वस्तु का त्वरण

⇒त्वरण एक सदिश राशि (Vector Quantity) है तथा इसका S.I. मात्रक m/s2 (मी०/से०) है |

⇒यदि किसी वस्तु का वेग समय के साथ बढ़ रहा है तब वस्तु का त्वरण धनात्मक होता है | यदि इसके विपरीत वस्तु का वेग समय के साथ घट रहा है तब वस्तु का त्वरण ऋणात्मक होता है | इस ऋणात्मक त्वरण को ही मंदन (Deceleration or Retardation) कहते हैं |

त्वरण के प्रकार (Types of Acceleration) :- त्वरण चार प्रकार का होता है-

(i) एक समान त्वरण या अचर त्वरण (Uniform Acceleration or Constant Acceleration) :- यदि किसी गतिमान वस्तु के वेग में समान समयान्तरालों में समान परिवर्तन होता है, तो वस्तु का त्वरण एक समान त्वरण कहलाता है |

(ii) असमान त्वरण या अस्थिर त्वरण (Non-Uniform or variable Acceleration) :- यदि किसी गतिमान वस्तु के वेग में समान समयान्तरालों में भिन्न-भिन्न परिवर्तन होता है, तो वस्तु का त्वरण असमान त्वरण या अस्थिर त्वरण कहलाता है |

(iii) औसत त्वरण (Average Acceleration) :- जब कोई वस्तु असमान त्वरण से गति करती है, तो वस्तु के वेग में कुल परिवर्तन तथा उसमें लगे कुल समय का अनुपात औसत त्वरण कहलाता है |

(iv) तात्क्षणिक त्वरण (Instantaneous Acceleration) :- गतिमान वस्तु का किसी क्षण वेग परिवर्तन की दर तात्क्षणिक त्वरण कहलाती है |

गति के समीकरण (Equation of Motion) :-

ऋजु रेखा में गतिमान वस्तु के वेग, तय की गयी दूरी तथा त्वरण के पारस्परिक सम्बन्धों को समीकरणों द्वारा व्यक्त किया जा सकता है | इन समीकरणों को गति का समीकरण भी कहते हैं |

यदि किसी वस्तु का प्रारम्भिक वेग u तथा एकसमान त्वरण a है, तो t समय में s दूरी तय करने के बाद वस्तु का वेग v हो जाता है , तब -

(i) $v=u+at$

(ii) $s=ut+\frac{1}{2}a{{t}^{2}}$

(iii) ${{v}^{2}}={{u}^{2}}+2as$

(iv) ${{S}_{t}}=u+\frac{1}{2}a(2t-1)$

जहाँ    u = प्रारम्भिक वेग

       v = समयान्तराल t में अन्तिम वेग

       s = समयान्तराल t में चली गयी दूरी

       t = समयान्तराल

       a = वस्तु का त्वरण

       St = t वें सेकेण्ड में चली गयी दूरी

यदि वस्तु उर्ध्वाधर ऊपर नीचे गति अर्थात् गुरुत्व के अन्तर्गत गति करती है तब गति के समीकरण होंगे-

(i) $v=u\pm gt$

(ii) $s=ut\pm \frac{1}{2}g{{t}^{2}}$

(iii) ${{v}^{2}}={{u}^{2}}\pm 2gh$

(iv) ${{S}_{t}}=u\pm \frac{1}{2}g(2t-1)$

Note ⇒ जब वस्तु उर्ध्वाधर से नीचे की ओर गिरती है, तो g का मान धनात्मक लेते हैं | और जब वस्तु उर्ध्वाधर ऊपर की ओर फेकी जाती है तब g का मान ऋणात्मक लेते हैं | g का मान प्रायः 9.8 मी०/से०2 और कभी-कभी गणना में आसानी के लिए 10 मी०/से०2 भी ले लिया जाता है |

 

 

No comments:

Post a Comment