Saturday, October 17, 2020

बल तथा गति के नियम (Force and Laws of Motion)

 बल (Force) :- हम अपने दैनिक जीवन में हर रोज अपने आस-पास ऐसी वस्तुएं देखते हैं, जो गति करती दिखाई पड़ती हैं, यानी समय के साथ अपनी स्थिति को बदलती हुई प्रतीत होती हैं | क्या आप जानते हैं कि किसी भी वस्तु को गतिमान करने के लिए क्या करना होगा ? किसी भी स्थिर वस्तु को गतिमान करने के लिए हमें उस वस्तु पर धक्का लगाना होगा या फिर उस वस्तु को खींचना होगा |

उदाहरण के लिए आप निम्न चित्र को देख सकते हैं |


चित्र में हरा बॉक्स गतिमान है, क्योंकि हरे बॉक्स पर गाड़ी द्वारा धक्का लगाया जा रहा है और लाल बॉक्स गतिमान है, क्योंकि लाल बॉक्स को रस्सी से गाड़ी द्वारा खींचा जा रहा है |

"वस्तु को धकेलने अथवा खींचने की यह क्रिया ही बल (Force) कहलाती है |"

बल के प्रभाव (Effect of Force) :-

(i) बल लगाकर किसी रुकी हुई वस्तु को गतिमान किया जा सकता है |

(ii) किसी गतिमान वस्तु को बल लगाकर रोका जा सकता है |

(iii) बल लगाकर किसी गतिशील वस्तु की गति को और बढ़ाया जा सकता है |

(iv) बल से किसी गतिमान वस्तु की गति की दिशा परिवर्तित की जा सकती है |



(i) सन्तुलित बल (Balanced Forces) :- जब किसी वस्तु पर लगने वाले सभी बलों का परिणामी बल शून्य हो, तो इन्हें सन्तुलित बल कहते हैं |

उदाहरण के लिए यदि एक गुटके को दोनों ओर समान बल लगाकर परस्पर विपरीत दिशा में खींचा जाता है, तब गुटके में कोई गति नहीं होती है |



अतः गुटके पर लगे बलों का परिणामी बल शून्य है यानी गुटके पर सन्तुलित बल कार्यरत है |

(ii) असन्तुलित बल (Unbalanced Forces) :- यदि वस्तु पर लगे बलों का परिणामी शून्य न हो, तो उन्हें असन्तुलित बल (Unbalanced Forces) कहते हैं |

उदाहरण :- यदि आपने कभी रस्साकशी खेल (Rope Pulling Game) देखा होगा तो आपको पता होगा कि रस्साकशी में यदि एक टीम दूसरी टीम से अधिक शक्तिशाली है, तो वह रस्से तथा कमजोर टीम को अपनी ओर खींच लेती है | इस दशा में रस्से पर लगने वाला बल असन्तुलित बल होता है |



जड़त्व (Inertia)

बल के बारे में हम जानते हैं कि बल एक बाह्य कारक है, जो किसी विराम अवस्था को गति की अवस्था में अथवा गति की अवस्था को विरामवस्था में परिवर्तित करता है या परिवर्तित करने का प्रयास करता है | यदि हम इस बाह्य कारक को हटा दें तो क्या होगा ? यदि बाह्य कारक को हटा दें, तो विरामावस्था में पड़ी वस्तु विरामावस्था में ही पड़ी रहेगी और गतिमान वस्तु गतिमान ही रहेगी |

इसका अर्थ यह हुआ कि कोई भी वस्तु बाह्य बल की अनुपस्थिति में स्वयं अपनी विराम अथवा एक समान गति की अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं कर सकती है |

अतः “वस्तुओं में स्वयं अपनी विराम अथवा एक-समान गति की अवस्था को उसी प्रकार बनाये रखने की प्रवृत्ति होती है, इस प्रवृति को जड़त्व (Inertia) कहते हैं |”

किसी वस्तु का जड़त्व इसके द्रव्यमान के अनुक्रमानुपाती होता है |

उदाहरण  :- नीचे चित्र से स्पष्ट है कि गाड़ी और उस पर रखा लाल रंग का गुटका दोनों ही v वेग से गतिमान है लेकिन जब गाड़ी दीवार से टकराती है, तब गाड़ी का वेग शून्य हो जाता है, लेकिन उस पर रखा लाल रंग का गुटका जड़त्व के कारण उसी वेग से आगे की ओर बढ़ जाता है |


जड़त्व के प्रकार (Type of Inertia) :- जड़त्व तीन प्रकार का होता है -

(i) विराम का जड़त्व (Inertia of Rest) :- वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह अपनी विराम अवस्था में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है, विराम का जड़त्व कहलाता है |

(ii) गति का जडत्व (Inertia of Motion) :- वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह अपने एक समान गति में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है, गति का जड़त्व कहलाता है |

(iii) दिशा का जड़त्व (Inertia of Direction) :- वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह अपनी गति की दिशा में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है, दिशा का जड़त्व कहलाता है |

न्यूटन के गति के नियम (Newton’s Laws of Motion)

सर्वप्रथम 1687 ई० में न्यूटन ने गतिविषयक तीन नियमों का प्रतिपादन अपनी पुस्तक ‘प्रिसिपिया’ (Principia) में किया था, जो निम्न है –

(1) गति विषयक प्रथम नियम (First Law of Motion) :-

"यदि कोई वस्तु विरामावस्था में है, तो वह विरामावस्था में ही रहेगी तथा यदि गति की अवस्था में है, तो एकसमान गति की अवस्था में ही रहेगी जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल न लगाया जाय |" इस नियम को जड़त्व अथवा गैलीलियों का नियम भी कहते हैं |

उदाहरण- गोली मारने से काँच में गोल छेद हो जाता है, परन्तु पत्थर मारने पर काँच टूकड़े- टूकड़े हो जाता है, क्योंकि जब गोली अत्यधिक तीव्र वेग से काँच से टकराती है, तो काँच का केवल वही भाग गति में आ पाता है जिसके सम्पर्क में गोली आती है |

और काँच का बाकी हिस्सा विराम जड़त्व के कारण अपनी जगह पर ही रहता है | अतः इससे पहले कि काँच का शेष भाग गति में आये उससे पहले गोली साफ़ छेद बनाती हुई निकल जाती है | इसके विपरीत यदि एक पत्थर का टुकड़ा काँच पर मारा जाता है, तो उसका वेग इतना अधिक नहीं होता कि पत्थर छेद बनाकर तुरन्त बाहर आ जाए बल्कि उसके आस-पास का पूरा काँच ही गतिमान हो जाता है, जिससे काँच के टूकड़े-टूकड़े हो जाते हैं |



(2) गति विषयक द्वितीय नियम (Second Law of Motion) :-

इस नियम के अनुसार “किसी पिण्ड पर कार्य करने वाला नेट बाह्य बल इसके संवेग परिवर्तन की दर के अनुक्रमानुपाती होता है |"

माना m द्रव्यमान का कोई पिण्ड u प्रारम्भिक वेग से सीधी रेखा में चल रहा है | t समय तक एक निश्चित बल F लगाने पर उस वस्तु का वेग v हो जाता है | तब इसका प्रारम्भिक और अन्तिम संवेग क्रमशः p1=mu तथा p2=mv होंगे | 

तब-

$F\propto \frac{\left( {{p}_{2}}-{{p}_{1}} \right)}{t}$

$F\propto \frac{mv-mu}{t}$

$F\propto m\left( \frac{v-u}{t} \right)$

$F\propto ma$

$F\propto kma$

$k=1$

$\left[ F=ma \right]$

बल का S.I. मात्रक kg-m-s-2­ (किग्रा-मी०-से०-2) होता है |

उदाहरण – एक क्रिकेट खिलाडी गेंद को कैच करते समय अपना हाथ पीछे खींचता है क्योंकि ऐसा करने से गेंद का वेग तुरन्त शून्य न होकर कुछ क्षण बाद शून्य होता है, जिससे गेंद में संवेग परिवर्तन की दर कम हो जाती है | इस कारण तेज गति से आ रही गेंद का प्रभाव हाथ पर कम पड़ता है | अगर गेंद को अचानक रोका जाता है, तो तीव्र गति से आ रही गेंद का वेग तुरन्त ही शून्य हो जाता अर्थात् गेंद के संवेग परिवर्तन की दर अधिक होती इसलिए कैच लपकने में अधिक बल लगाना पड़ता और हो सकता है खिलाडी की हथेली में चोट लग जाए |

 

Newton 2nd Law Example

 

 

 

 

 

 

 

 

3- गति विषयक तृतीय नियम (Third Law of Motion) :-  इस नियम के अनुसार “जब कोई वस्तु किसी दूसरी वस्तु पर बल लगाती है, तो दूसरी वस्तु भी पहली वस्तु पर उतना ही बल विपरीत दिशा में लगाती है | पहली वस्तु द्वारा लगाए गए बल को क्रियात्मक बल अथवा क्रिया (Force of Action or Action) तथा दूसरी वस्तु द्वारा लगाए गए बल को प्रतिक्रियात्मक बल अथवा प्रतिक्रिया (Force of Reaction or Reaction) कहते हैं |

उदाहरण- (i) रॉकेट की गति – रॉकेट के इंजन में ईंधन के जलने से बहुत अधिक मात्रा में गर्म गैसें उत्पन्न होती है, जो रॉकेट के पीछे तीव्र वेग से बाहर निकलती है, जितना बल रॉकेट द्वारा गैसों पर पीछे की ओर लगाया जाता है, उतना ही बल प्रतिक्रिया स्वरुप गैसों द्वारा रॉकेट पर आगे की ओर लगता है, जिससे रॉकेट आगे की ओर बढ़ता है |

Newton 3rd Law Example

उदाहरण- (ii) जब किसी बन्दूक से गोली छूटती है, तो हमें बन्दूक द्वारा पीछे की ओर एक झटके का अनुभव होता है | क्यों ?

क्योंकि बन्दूक से गोली छोड़ने पर बन्दूक द्वारा गोली पर आगे की ओर जो बल (क्रिया) लगाया जाता है, उससे गोली आगे चली जाती है | इसकी प्रतिक्रिया के रूप में गोली द्वारा भी बन्दूक पर उतना ही बल पीछे की ओर लगता है, जिससे हमें पीछे की ओर एक झटके का अनुभव होता है |

संवेग (Momentum)

“किसी गतिशील वस्तु के द्रव्यमान और वेग के गुणनफल को संवेग कहते हैं |” संवेग को p से व्यक्त करते हैं |

[ p=mv ]

संवेग एक सदिश राशि है जिसकी दिशा वही होती है, जो वेग की दिशा होती है | इसका S.I. मात्रक किग्रा-मी०-से०-1 (kg.-m-s-1) होता है |

बल का आवेग (Impulse of a Force)

आवेग किसी पिण्ड पर एक अल्प समय के लिए कार्य करने वाले बल के प्रभाव के रूप में परिभाषित किया जाता है | आवेग, बल तथा समयान्तराल के गुणनफल के बराबर होता है | इसे ‘I’ से व्यक्त करते हैं | यह एक सदिश राशि है |

⇒आवेग = बल × समयान्तराल

[ I = F × △t ]

गति के द्वितीय नियम से हम जानते हैं-

$F=\frac{\Delta p}{\Delta t}$

$I=\frac{\Delta p}{\Delta t}\times \Delta t$

$\left[ I=\Delta p \right]$

अतः आवेग पिण्ड के संवेग परिवर्तन के भी बराबर होता है |

संवेग-संरक्षण (Conservation of Momentum)

यदि दो या दो से अधिक वस्तुओं के निकाय पर कोई बाह्य बल आरोपित न हो, तो निकाय का सम्पूर्ण संवेग अपरिवर्तित रहता है |

अर्थात्  [ △p=0 ]

माना m1 एवं m2 द्रव्यमान के दो पिण्ड क्रमशः u1 व u2 वेग से किसी चिकने क्षैतिज तल पर गति कर रहे हैं | इस दशा में इनका सम्पूर्ण संवेग m1u1+m2u2 होगा | अब यदि u1>u2 हो, तो पिण्ड m1, पिण्ड m2 से टकराएगा , टकराने के बाद इनके वेग क्रमशः v1 तथा v2 हो जाते हैं | अब इनका कुल संवेग m1v1+m2v2 होगा |

Conservation Of Motion


 

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