जब परस्पर सम्पर्क में स्थित दो वस्तुओं की सतहों के बीच आपेक्षिक गति होती है अथवा आपेक्षिक गति उत्पन्न होने वाली होती है, तो दोनों सतहों के सम्पर्क तल में एक पारस्परिक बल उत्पन्न हो जाता है, जो दोनों सतहों के बीच होने वाली आपेक्षिक गति का विरोध करता है | इस बल को ही घर्षण बल अथवा घर्षण कहते हैं | अतः “घर्षण वह बल है जो एक पिण्ड को दूसरे पिण्ड पर फिसलने से रोकता है |”
घर्षण बल सदैव गति करने वाली वस्तु पर उसकी गति की दिशा के विपरीत दिशा में सम्पर्क तल के समान्तर कार्य करता है | जैसे – निम्न चित्र में फिसलते हुए गुटके के सम्पर्क तलों के बीच गति के विपरीत दिशा में घर्षण बल कार्य कर रहा है |
घर्षण के प्रकार (Type of Friction )
घर्षण तीन प्रकार के होते हैं –
(i) स्थैतिक घर्षण बल (Static Frictional Force) :- जब एक वस्तु को दूसरी वस्तु के तल पर चलाने का प्रयास किया जाता है, तो गति की अवस्था में आने से पूर्व दोनों वस्तु के सम्पर्क तलों के मध्य कार्य करने वाले घर्षण बल को स्थैतिक घर्षण बल कहते हैं | इसे fs से प्रदर्शित करते हैं |
(ii) सीमान्त घर्षण बल (Limiting Frictional Force) :- जब किसी गुटके पर लगे आरोपित बल को बढ़ाते जाते हैं, तो स्थैतिक घर्षण बल एक निश्चित सीमा तक बढ़ता जाता है | इसके पश्चात् गुटका चलना प्रारम्भ कर देता है | स्थैतिक घर्षण बल के इस अधिकतम मान को ही सीमान्त घर्षण अथवा सीमान्त घर्षण बल कहते हैं |
इसे${{f}_{l}}$ से प्रदर्शित करते हैं |
$\left[ {{f}_{l}}={{\mu }_{l}}R \right]$
जहाँ µl = सीमान्त घर्षण गुणांक
R= अभिलम्ब प्रतिक्रिया
घर्षण कोण (Angle of Friction)- सीमान्त घर्षण की अवस्था में सीमान्त घर्षण बल fl तथा अभिलम्ब प्रतिक्रिया R का परिणामी (S) अभिलम्ब प्रतिक्रिया R के साथ जो कोण बनाता है, उसे घर्षण कोण कहते हैं |
यदि घर्षण कोण ? है, तो
$\tan \theta =\frac{{{f}_{l}}}{R}$
$\tan \theta =\frac{{{\mu }_{l}}R}{R}$
$\tan \theta ={{\mu }_{l}}$
$\left[ \theta ={{\tan }^{-1}}\left( {{\mu }_{l}} \right) \right]$
(iii) गतिक घर्षण बल (Kinetic Frictional Force) :- जब सम्पर्क में स्थित दो वस्तुओं के बीच आपेक्षिक गति होती है, तो वस्तुओं के सम्पर्क तलों द्वारा एक दूसरे पर आरोपित घर्षण बल, गतिक घर्षण बल कहलाता है | इसे ‘fk’ से व्यक्त करते हैं | इसका मान सदैव सीमान्त घर्षण बल से कम होता है |
यदि कोई गुटका एक समान गति में होता है,
तब $\left[ {{f}_{k}}={{\mu }_{k}}R \right]$
गतिक घर्षण बल दो प्रकार का होता है –
(i) लोटनिक घर्षण बल (Rolling Frictional Force) :- जब कोई वस्तु किसी सतह पर लुढ़कती है, तो वस्तु और सतह के बीच लगने वाले सतह के बीच लगने वाले घर्षण बल को लोटनिक घर्षण बल कहते हैं |
लोटनिक घर्षण बल स्थैतिक या गतिक घर्षण की तुलना में नगण्य होता है |
(ii) सर्पी घर्षण बल (Sliding Frictional Force) :- जब कोई वस्तु किसी सतह पर सरकती है, तब उस वस्तु और सतह के बीच लगने वाला घर्षण बल, सर्पी घर्षण बल कहलाता है |
घर्षण की आवश्यकता (Necessity of Friction)-
(i) रोड़ पर हमें चलने के लिए हमें पर्याप्त घर्षण की आवश्यकता होती है | यदि रोड़ को अधिक चिकना कर दिया जाए, तो घर्षण कम होने के कारण हम फिसल सकते हैं |
(ii) गाड़ियों के पहियों और सड़क के बीच पर्याप्त घर्षण मिल सके इसके लिए हम गाड़ियों के टायरों को खुरदरा (Rough) बनाते हैं |
(iii) यदि घर्षण न होता तो, गाड़ियों को ब्रेक लगाकर रोकना असम्भव होता हैं |
(iv) घर्षण के कारण ही पेपर या ब्लैक बोर्ड पर लिखना सम्भव हो पाता है |
घर्षण एक दोष (Friction is an Evil)-
(i) मशीनों में घर्षण के कारण ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा व्यर्थ हो जाता है इसलिए मशीनों की दक्षता कम हो जाती है |
(ii) यदि घर्षण अधिक हो, तो मशीनों के कल पुर्जों के टूटने फूटने का डर रहता है |
(iii) मशीन के गतिशील भागों में घर्षण होने के कारण उन भागों में ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिसके कारण वे भाग गर्म हो जाते हैं |
(iv) घर्षण के कारण मशीनों के आवेशित हो जाने के कारण दुर्घटना की सम्भावना बनी रहती है |
घर्षण को कम करने की विधियाँ (Methods to Reduce Friction)
1- पॉलिश द्वारा (By polishing) :- यदि किसी वस्तु की सतह खुरदरी (Rough) है, तो उस पर पॉलिश लगाकर घर्षण को कम किया जाता है या फिर सतह को रगड़ कर चिकना करके घर्षण को कम किया जा सकता है |
2- स्नेहक (Lubricant) द्वारा :- मशीनों में गतिशील कल-पुर्जों में कम घर्षण हो, इसके लिए हम स्नेहक का प्रयोग करते हैं, जिससे घर्षण कम हो जाता है और मशीनों के कल-पुर्जें कम घिसते है, और मशीन अधिक समय तक काम करने के लिए सक्षम हो पाती है |
(3) बॉल बियरिंग द्वारा (By ball Bearing) :- गयात्मक घर्षण की अपेक्षा लोटनी घर्षण काफी कम होता है | मशीन में टूट-फूट कम करने तथा घर्षण के विरुध्द ऊर्जा ह्रास कम करने के लिए मशीन के घूमने वाले भागों (सतहों) के बीच स्टील की छोटी-छोटी ठोस गोलियाँ रख देते हैं, जिनको बॉल बियरिंग (ball bearings) कहते हैं |
जब एक भाग दूसरे भाग के सापेक्ष चलता है, तो ये गोलियाँ दोनों भागों पर घूमती हैं | इस प्रकार गयात्मक घर्षण के स्थान पर लोटनी घर्षण ही प्रभावशाली होता है, जिसका मान बहुत कम होता है, अतः ऊर्जा ह्रास काफी कम हो जाती है |





No comments:
Post a Comment