Saturday, October 17, 2020

गुरुत्वाकर्षण क्या है (What is Gravitation)-

 यदि किसी गेंद को हाथ में लेकर बिना कोई बल लगाये स्वतन्त्र छोड़ देते हैं, तो यह पृथ्वी पर गिर पड़ता है | जब गेंद को हाथ से छोड़ा जाता है, तब गेंद विराम की अवस्था में होता है, लेकिन जैसे-जैसे गेंद नीचे गिरता है, इसकी गति भी तेज होती जाती है, यानी गेंद त्वरित गति से नीचे गिरता है |


 लेकिन न्यूटन के प्रथम नियम से हम जानते हैं कि यदि कोई वस्तु विरामावस्था में पड़ी है, तो बीना किसी बाह्य बल लगाये वह गति नहीं कर सकती है |

जब हमने गेंद को ऊपर से छोड़ा था, तब हमने गेंद पर कोई बाह्य बल नहीं लगाया था लेकिन फिर भी गेंद नीचे की ओर त्वरित गति से गिरता है |

इसका अर्थ यह हुआ कि गेंद पर कोई बल कार्य कर रहा है, जिसके कारण गेंद में नीचे की ओर गति होती है | इस बल की व्याख्या जिस वैज्ञानिक ने की उस वैज्ञानिक का नाम न्यूटन था | न्यूटन ने यह सिद्धान्त प्रतिपादित किया कि इस ब्रह्माण्ड में सभी वस्तुएँ एक दूसरे को अपनी ओर आकर्षित करती हैं | “द्रव्यमान के कारण दो वस्तुएँ एक दूसरे को जिस बल से अपनी ओर आकर्षित करती हैं उस बल को गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं | दो वस्तुओं या पिण्डों द्वारा एक दूसरे के आकर्षण के गुण को गुरुत्वाकर्षण (Gravitation) कहते हैं |”

न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का नियम (Newton’s Law of Gravitation) :-

न्यूटन ने दो पिण्डों के पारस्परिक गुरुत्वाकर्षण बल सम्बन्धी एक नियम प्रस्तुत किया | जिसे न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण सम्बन्धी नियम कहते हैं | इस नियम के अनुसार – “किन्हीं दो पिण्डो के बीच कार्य करने वाला आकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है | इस बल की दिशा दोनों पिण्डो को मिलाने वाली रेखा की सीध में होती है |”

माना दो पिण्डों के द्रव्यमान क्रमशः m1 व m2 तथा उनके केन्द्रों के बीच की दूरी r है,



तो उनके बीच कार्य करने वाला आकर्षण बल,

$F\propto {{m}_{1}}{{m}_{2}}$

तथा $F\propto \frac{1}{{{r}^{2}}}$

अथवा $F\propto \frac{{{m}_{1}}{{m}_{2}}}{{{r}^{2}}}$

अतः $\left[ F=G\frac{{{m}_{1}}{{m}_{2}}}{{{r}^{2}}} \right]$

जहाँ G एक अनुक्रमानुपाती नियतांक (Constant) है |

इसे सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक भी कहते हैं | क्योंकि G का मान पिण्डों की प्रकृति, स्थान, समय, माध्यम, ताप आदि पर निर्भर नहीं करता है | प्रयोग द्वारा G का मान 6.67⨉10-11 न्यूटन-मीटर2/किग्रा2 (N-M2/Kg2) प्राप्त होता है |

गुरुत्व तथा गुरुत्वीय त्वरण (Gravity and Gravity Acceleration) :-

किन्हीं दो वस्तुओं के बीच कार्य करने वाले आकर्षण बल को गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं | यदि दो वस्तुओं में से एक वस्तु पृथ्वी हो, तो इस गुरुत्वाकर्षण बल को गुरुत्व (Gravity) कहते हैं | अतः गुरुत्व वह आकर्षण बल है, जिससे पृथ्वी किसी वस्तु को अपने केन्द्र की ओर खींचती है | इस बल के कारण वस्तु में जो त्वरण उत्पन्न होता है, उसे गुरुत्वीय त्वरण (Gravity Acceleration) कहते हैं |


इसे g से व्यक्त किया जाता है | पृथ्वी तल पर g का औसत मान 9.8 मीटर/सेकेण्ड2 है |

Note :- किसी वस्तु पर पृथ्वी द्वारा लगने वाले गुरुत्व बल को उस वस्तु का भार भी कहते हैं |

गुरुत्वीय त्वरण (g) के मान में परिवर्तन (Change in value Gravitational Acceleration g) :-

पृथ्वी के पृष्ठ पर ‘g’ का मान हर जगह एक जैसा नही रहता है | यह एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने पर परिवर्तित होता है | ध्रुवों पर ‘g’ का मान अधिकतम तथा विषुवत रेखा (Equator) पर न्यूनतम होता है |

पृथ्वी के केन्द्र पर इसका मान शून्य होता है और जब हम पृथ्वी के पृष्ठ के ऊपर या नीचे जाते हैं तब भी यह परिवर्तित होता है |

(A) पृथ्वी तल पर g का मान – 

माना पृथ्वी का द्रव्यमान Me (=6.0⨉1024 kg) तथा पृथ्वी की औसत त्रिज्या Re (= 6.37⨉106 मीटर)  है | माना पृथ्वी तल पर m द्रव्यमान का एक पिण्ड स्थित है |



इस स्थिति में पिण्ड उत्पन्न गुरुत्वीय त्वरण होगा -

$\left[ g\quad =\quad \frac { G{ M }_{ e } }{ { R }_{ e }^{ 2 } } \right]$

(B) पृथ्वी-तल से ऊपर जाने पर ‘g’ के मान में परिवर्तन – माना m द्रव्यमान के पिण्ड को पृथ्वी-तल से ऊपर की ओर h दूरी तक उठाया जाता है |



h ऊँचाई पर पिण्ड में उत्पन्न गुरुत्वीय ‘g’ होगा –

$\left[ { g }^{ ' }\quad =\quad g\left( 1-\frac { 2h }{ { R }_{ e } } \right) \right]$

ऊपर सूत्र से स्पष्ट है कि-

⇒ g' < g

अतः जैसे-जैसे पृथ्वी के ऊपर की ओर जाते हैं, तो गुरुत्वीय त्वरण का मान घटता जाता है |

(C) पृथ्वी-तल से नीचे जाने पर g के मान में परिवर्तन :- पृथ्वी तल से h गहराई पर m द्रव्यमान के पिण्ड के लिए गुरुत्वीय त्वरण निम्न होगा –



$\left[ { g }^{ ' }\quad =\quad g\left( 1-\frac { h }{ { R }_{ e } } \right) \right]$

ऊपर सूत्र से स्पष्ट है कि

⇒ g' < g

अतः जैसे-जैसे पृथ्वी तल से गहराई (h) बढ़ेगी, वैसे-वैसे गुरुत्वीय त्वरण का मान कम होता जायेगा और पृथ्वी के केन्द्र पर गुरुत्वीय त्वरण का मान शून्य होगा |

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