जब कोई पिण्ड किसी स्थिर अक्ष के परितः इस प्रकार गति करता है, कि पिण्ड के प्रत्येक कण वृत्तीय पथ पर चल रहा हो तथा सभी वृत्तों के केन्द्र उस अक्ष पर स्थित हो, तो पिण्ड की यह गति घूर्णन गति तथा स्थिर अक्ष घूर्णन अक्ष (Axis of Rotation) कहलाता है |
उदाहरण – निम्न चित्र में पृथ्वी और टेबल फैन के ब्लेड दोनों ही एक स्थिर अक्ष के परितः घूम रहे हैं, अतः पृथ्वी और फैन के ब्लेड की गति घूर्णन गति है |
Rotational Motion | Rotational Motion |
बल-आघूर्ण (Moment of a Force or Torque)
जब किसी पिण्ड को कोई बाह्य बल पिण्ड के किसी अक्ष के परितः घूमाता है या घूमाने का प्रयास करता है, तो इसे उस बल का आघूर्ण कहते हैं | इसे ‘τ’ (टाउ) से प्रदर्शित करते हैं |
⇒ बल-आघूर्ण=बल⨉बल की क्रिया-रेखा की घूर्णन अक्ष से लम्बवत दूरी
$\left[ \tau =F\times d \right]$
यह एक सदिश राशि है तथा इसका S.I. मात्रक न्यूटन-मीटर होता है |
धनात्मक और ऋणात्मक बल-आघूर्ण (Positive and Negative Torque)-
यदि बल पिण्ड को घड़ी की सुइयों के चलने की विपरीत दिशा में अर्थात् वामावर्त (Anti-clock-wise) घूमाने की प्रवृत्ति रखता है, तो उसका बल आघूर्ण धनात्मक कहलाता है |
यदि बल पिण्ड को घड़ी की सुइयों के चलने की दिशा में अर्थात् दक्षिणावर्त (Clockwise) घूमाने की प्रवृत्ति रखता है, तो उसका बल आघूर्ण ऋणात्मक कहलाता है |
बल-आघूर्ण के दैनिक जीवन में उदाहरण (Example of Torque in Daily Life)
⇒ दरवाजों में हत्था कब्जों से दूर क्यों लगाया जाता है ? दरवाजों में हत्था कब्जों से दूर इसलिए लगाया जाता है, ताकि हत्थे पर लगाए बल का कब्जों के परितः बल-आघूर्ण का मान अधिक हो सके | कब्जों के परितः बल आघूर्ण जितना अधिक रहेगा उतना ही कम बल लगाना पड़ेगा दरवाजों को खोलने अथवा बन्द करने में |
⇒कुम्हार के चाक में हत्था लगाने का गड्ढा परिधि के पास क्यों होता है ? कुम्हार के चाक में परिधि के पास किनारे पर एक गड्ढा होता है, जिसमें कुम्हार डण्डा लगाकर उस पर हाथ से बल लगाता है |
इस बल के कारण बल आघूर्ण τ =F⨉d उत्पन्न होता है, जिसके कारण चाक घूमने लगता है |
गड्ढा परिधि के पास होने से घूर्णन अक्ष से बल की लम्बवत दूरी d अधिक हो जाती है, जिससे अक्ष के परितः बल-आघूर्ण का मान अधिक प्राप्त होता है, जिसके कारण कुम्हार को चाक को घूमाने में कम बल लगाना पड़ता है |
बल-युग्म (Couple)
यदि किसी वस्तु के दो विभिन्न बिन्दुओं पर दो बराबर विपरीत तथा समान्तर बल (अर्थात् उनकी क्रिया रेखाएँ अलग हों) तो ये बल बल-युग्म बनाते हैं | ऐसे बल स्थानान्तरिय गति उत्पन्न नहीं करते अपितु इनके प्रभाव से पिण्ड में केवल घूर्णन गति उत्पन्न होती है |
बल-युग्म का आघूर्ण (Moment of Couple)
बल-युग्म के किसी एक बल के परिमाण तथा बल-युग्म की भुजा के गुणनफल को बल-युग्म का आघूर्ण कहते हैं | इसे ‘τ’ से प्रदर्शित करते हैं | यह एक सदिश राशि है तथा इसका S.I. मात्रक न्यूटन-मीटर होता है |
बल-युग्म का आघूर्ण = एक बल⨉दोनों बलों की क्रिया-रेखाएँ की बीच की दूरी
= एक बल⨉बल-युग्म की भुजा
$\left[ \tau =F\times d \right]$
बल-युग्म के उदाहरण (Examples of Couple)-
(i) ताले में चाबी घुमाने में लगे बल |
(ii) पानी के नल की टोंटी खोलने अथवा बन्द करने में लगे बल |
(iii) बस अथवा कार के स्टेयरिंग घुमाने में आरोपित बल |
आघूर्णों का सिद्धान्त (Principle of Momentum)-
इस सिद्धान्त के अनुसार, “संतुलन की अवस्था में, किसी पिण्ड पर लगे दक्षिणावर्त बल आघूर्णों का योग, वामावर्त बल आघूर्णों के योग के बराबर होता है |''
यदि पिण्ड सन्तुलन में है तब-
⇒ दक्षिणावर्त बल अघूर्ण = वामावर्त बल आघूर्ण
$\Rightarrow \left[ {{F}_{1}}\times {{x}_{1}}={{F}_{2}}\times {{x}_{2}} \right]$
जड़त्व-आघूर्ण (Moment of Inertia)
जब कोई पिण्ड किसी अक्ष के परितः घूर्णन करता है, तो उसमें अपनी घूर्णन अवस्था में होने वाले परिवर्तन का विरोध करने की प्रवृत्ति होती है | विरोध करने का यही गुण पिण्ड का घूर्णन अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण कहलाता है |
पिण्ड के किसी कण का घूर्णन अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण उस कण के द्रव्यमान तथा उसकी घूर्णन अक्ष से दूरी के वर्ग के गुणनफल के बराबर होता है |
$\left[ I=m{{r}^{2}} \right]$
चूँकि एक पिण्ड में बहुत सारे कण होंगे, इसलिए सभी कणों का घूर्णन अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण-
$\left[ I={{m}_{1}}r_{1}^{2}+{{m}_{2}}r_{2}^{2}+{{m}_{3}}r_{3}^{2}+....... \right]$
M.K.S. पध्दति में इसका मात्रक किग्रा-मीटर2 होता है |
घूर्णन गतिज ऊर्जा (Rotational Kinetic Energy)
घूर्णन करती हुई किसी वस्तु की घूर्णन गतिज ऊर्जा निम्न सूत्र द्वारा ज्ञात करते हैं –
$\left[ K=\frac{1}{2}I{{\omega }^{2}} \right]$
जहाँ I = जड़त्व आघूर्ण
ω= वस्तु का कोणीय वेग
कुछ नियमित आकृति की वस्तुओं के जड़त्व-आघूर्णों के सूत्र (Formulae for the Moment of Inertia)-
1- पतली छड़ (Thin Rod) :- यदि किसी पतली छड़ का द्रव्यमान M व लम्बाई l हो, तो छड़ की लम्बाई के लम्बवत् तथा उसके द्रव्यमान-केन्द्र में को गुजरने वाली अक्ष के परितः छड़ का जड़त्व-आघूर्ण-
$\left[ I=\frac{M{{l}^{2}}}{12} \right]$
2- आयताकार पटल (Rectangular Plate) :- यदि पटल का द्रव्यमान M, लम्बाई l तथा चौड़ाई b हो, तो उसके तल के लम्बवत् तथा उसके द्रव्यमान-केन्द्र में को गुजरने वाली अक्ष के परितः उसका जड़त्व-आघूर्ण-
$I=M\left( \frac{{{l}^{2}}+{{b}^{2}}}{12} \right)$
3- वृत्ताकार छल्ला अर्थात् वलय (Circular Ring) :- यदि वलय (वृत्ताकार छल्ले) का द्रव्यमान M व त्रिज्या R हो, तो उसका अपनी ज्यामितीय अक्ष (वलय के तल के लम्बवत् तथा केन्द्र में को गुजरने वाली अक्ष) के परितः जड़त्व-आघूर्ण-
$\left[ I=M{{R}^{2}} \right]$
4- वृत्ताकार डिस्क अथवा ठोस डिस्क (Circular Disc or Solid Disc) :- यदि डिस्क का द्रव्यमान M व त्रिज्या R हो, तो उसके तल के लम्बवत् तथा उसके द्रव्यमान-केन्द्र में को गुजरने वाली अक्ष के परितः उसका जड़त्व-आघूर्ण-
$\left[ I=\frac{1}{2}M{{R}^{2}} \right]$
5- खोखली डिस्क (Annular Disc) :- यदि डिस्क का द्रव्यमान M तथा आन्तरिक त्रिज्या R1 व बाह्य त्रिज्या R2 हो, तो उसकी ज्यामितीय अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण-
$\left[ I=\frac{1}{2}M\left( R_{1}^{2}+R_{2}^{2} \right) \right]$
इस सूत्र में,
यदि R1=0 तथा R2=R है, तो $I=\frac{1}{2}M{{R}^{2}}$(ठोस डिस्क)
यदि R1=R तथा R2=R है, तो $I=M{{R}^{2}}$(वलय)
6- ठोस बेलन (Solid Cylinder) :- यदि बेलन का द्रव्यमान M, लम्बाई l तथा त्रिज्या R हो, तो ठोस बेलन का-
(i) अपनी ज्यामितीय अक्ष (own geometrical axis) के परितः जड़त्व-आघूर्ण-
$\left[ I=\frac{1}{2}M{{R}^{2}} \right]$
(ii) अपनी लम्बाई के लम्बवत तथा द्रव्यमान-केन्द्र से गुजरने वाली अक्ष अर्थात् निरक्षीय अक्ष (equatorial axis) के परितः जड़त्व-आघूर्ण-
$\left[ I=M\left( \frac{{{l}^{2}}}{12}+\frac{{{R}^{2}}}{4} \right) \right]$
7- खोखला बेलन (Hollow Cylinder) :- यदि पूर्णतया खोखले बेलन का द्रव्यमान M, लम्बाई l तथा त्रिज्या R हो, तो बेलन का-
(i) अपनी ज्यामितीय अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण-
$\left[ I=M{{R}^{2}} \right]$
(ii) अपनी निरक्षीय के परितः जड़त्व-आघूर्ण-
$I=M\left[ \frac { { { l }^{ 2 } } }{ 12 } +\frac { { { R }^{ 2 } } }{ 2 } \right]$
8- आंशिक खोखला बेलन (Annular Cylinder) :- यदि बेलन का द्रव्यमान M, लम्बाई l, आन्तरिक त्रिज्या R1तथा बाह्य त्रिज्या R2 हो, तो बेलन का-
(i) अपनी ज्यामितीय अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण-
$I=\frac { 1 }{ 2 } M\left[ { { R }_{ 1 } }^{ 2 }+{ { R }_{ 2 } }^{ 2 } \right]$
(ii) अपनी लम्बाई के लम्बवत् तथा द्रव्यमान-केन्द्र में से गुजरने वाली अक्ष (निरक्षीय अक्ष) के परितः जड़त्व-आघूर्ण-
$\left[ I=M\left( \frac { { { l }^{ 2 } } }{ 12 } +\frac { R_{ 1 }^{ 2 }+R_{ 2 }^{ 2 } }{ 4 } \right) \right]$
इन सूत्रों में R1=0, R2=R रखने पर, ठोस बेलन के सूत्र प्राप्त होंगे |
R1=R2=R रखने पर, खोखले बेलन के सूत्र प्राप्त होंगे |
9- ठोस गोला (Solid Sphere) :- यदि गोले का द्रव्यमान M तथा त्रिज्या R हो, तो उसके व्यास के परितः उसका जड़त्व-आघूर्ण-
$\left[ I=\frac { 2 }{ 5 } M{ { R }^{ 2 } } \right]$
10- खोखला गोला अथवा गोलीय कोश (Hollow Sphere or Spherical Shell) :- यदि गोलीय कोश का द्रव्यमान M तथा त्रिज्या R हो, तो उसके व्यास के परितः उसका जड़त्व-आघूर्ण -
$\left[ I=\frac { 2 }{ 3 } M{ { R }^{ 2 } } \right]$
11- आंशिक खोखला गोला (Partially Hallow Sphere) :- यदि खोखले गोले का द्रव्यमान M तथा आन्तरिक व बाह्य त्रिज्याएँ क्रमशः R1 व R2 हैं, तो उसके व्यास के परितः उसका जड़त्व-आघूर्ण-
$I=\frac { 2 }{ 3 } M\left[ \frac { R_{ 2 }^{ 5 }-R_{ 1 }^{ 5 } }{ R_{ 2 }^{ 3 }-R_{ 1 }^{ 3 } } \right]$
कोणीय संवेग (Angular Momentum) :-
एक पिण्ड का किसी अक्ष के परितः कोणीय संवेग, जड़त्व आघूर्ण तथा कोणीय वेग के गुणनफल के बराबर होता है | इसे J से प्रदर्शित करते हैं |
$\left[ J=I\omega \right]$
इसका S.I. मात्रक जूल-सेकेण्ड होता है |
कोणीय-संवेग-संरक्षण का सिद्धान्त (Law of Conservation Angular Momentum) :-
यदि किसी अक्ष के परितः घूमते हुए पिण्ड पर कोई बाह्य बल-आघूर्ण कार्य न कर रहा हो, तो उस पिण्ड का कोणीय संवेग नियत रहता है |
अर्थात् [J=Iω=नियतांक]
इसे कोणीय-संवेग-संरक्षण का नियम कहते हैं | यदि I घटेगा तो ω बढ़ेगा, यदि I बढ़ेगा तो ω घटेगा |























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