वह युक्ति अथवा निकाय जिनसे संसार को चलाए रखने के लिए लगातार एवं सुविधापूर्वक ऊर्जा मिलती रहती है, ऊर्जा के स्रोत कहलाते हैं |
जैसे- सूर्य हमारी धरती के लिए ऊर्जा का सबसे अच्छा स्रोत है | इसी की ऊर्जा लेकर पेड़ पौधे फलते-फूलते हैं | जिनसे हमें फल-फूल व लकड़ियाँ प्राप्त होती हैं | पवन ऊर्जा व जल ऊर्जा का स्रोत भी सूर्य है | इसीलिए पृथ्वी पर समस्त ऊर्जा स्रोतों का मूल सूर्य को माना जाता है |
अब तक पृथ्वी पर मनुष्य ने जितने भी ऊर्जा के स्रोत खोजे अथवा बनाएँ हैं, उन सब में सूर्य की ही ऊर्जा किसी न किसी रूप में एकत्रित है |
दूसरे शब्दों में कहे तो सभी ऊर्जाएँ सूर्य की ऊर्जा का ही रुपान्तरण हैं |
ऊर्जा के स्रोतों का वर्गीकरण (Classification of Sources of Energy)
ऊर्जा के स्रोतों को मुख्यतः दो प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है-
(A) ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोत (Renewable Sources of Energy)- बहता हुआ पानी, पवन, ज्वार-भाटा तथा जैव गैस (बायोगैस) ऊर्जा के कुछ ऐसे स्रोत हैं, जिनका अस्तित्व सूर्य से है | प्रकृति विभिन्न प्रक्रमो द्वारा हमारी धरती पर सूर्य से प्राप्त ऊष्मा व प्रकाश से ऊर्जा के इन स्रोतों को लगातार बनाए रखती है | ऊर्जा के ऐसे स्रोतों को नवीकरणीय स्रोत कहते हैं |
ऊर्जा के इन स्रोतों से हमें लम्बे समय तक बिना किसी प्रदूषण के लगातार ऊर्जा मिलती रहती है |
नवीकरणीय ऊर्जा को उपयोग लेने के लिए वैज्ञानिक युक्तियाँ-
(1) सौर कूकर (Solar Cooker) :- यह एक ऐसी युक्ति है, जिसमें सौर ऊर्जा का उपयोग करके भोजन पकाया जाता है |
चित्रानुसार पकाए जाने वाले भोजन को बाहर से काली पुती हुई स्टील अथवा एल्युमिनियम के बर्तन में डालकर सौर कूकर के अन्दर रख देते हैं तथा शीशे के ढक्कन को बन्द कर देते हैं | फिर कुकर परावर्तक तल अर्थात् दर्पण को खड़ा करके धूप में रख देते हैं | जब सूर्य की किरणें परावर्तक तल से टकराकर सौर कूकर के बक्से में प्रवेश करती है तब धीरे-धीरे बक्से के अन्दर की काली सतह द्वारा सूर्य की उष्मीय प्रभाव वाली अवरक्त किरणें अवशोषित कर ली जाती हैं | जिसके कारण सौर कुकर का ताप बढ़ता जाता है | लगभग दो या तीन घण्टे में सौर कूकर के अन्दर का ताप 100०C तथा 140०C के बीच हो जाता है | यही ऊष्मा सौर कूकर के अन्दर बर्तन में रखे भोजन को पका देती है |
(2) पवन चक्की (Wind Mill) :- पवन चक्की एक ऐसी युक्ति है, जिसे वायु की गतिज ऊर्जा की मदद से चलाया जाता है |
इसमें बिजली के पंखों की भाँती ब्लेड लगे होती हैं जो गतिशील वायु के टकराने से घूमने लगते हैं | घूमते हुए ब्लेडों की घूर्णन गति से जल पम्प तथा आटा चक्की चलाई जा सकती है | पवन चक्की का उपयोग पवन टरबाइन द्वारा विद्युत् उत्पादन में भी किया जाता है |
(3) जैव गैस या बायोगैस संयंत्र (biogas plant) :- जैव गैस का बायोगैस संयंत्र एक ऐसी युक्ति है, जिसमें लकड़ी, कृषि अपशिष्ट तथा जन्तुओं की विष्टा (गोबर आदि) का उपयोग एक गैसीय ईंधन प्राप्त करने के लिए किया जाता है, जिसे जैव गैस या बायो गैस कहते हैं | इसका उपयोग भोजन पकाने के साथ-साथ इंजन चलाने में भी किया जा सकता है |
(B) ऊर्जा के अनवीकरणीय स्रोत (Non-renewable Sources of Energy) :- कोयला, केरोसिन तथा कुकिंग गैस जैसे ईंधनों का उपयोग अपने घरेलू कार्यों के लिए करते हैं | स्वचालित वाहनों तथा उद्योगों में पेट्रोल तथा प्राकृतिक गैस का उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है | इन ऊर्जा के स्रोतों को अनवीकरणीय स्रोत कहते हैं |
ऊर्जा के इन स्रोतों का निर्माण करोड़ों वर्षों तक पृथ्वी की सतह के अन्दर दबे हुए वनस्पति अवशेषों से हुआ है | ये ऊर्जा स्रोत एक बार उपयोग में आने के बाद दोबारा उपलब्ध नहीं होंगे | इनके प्रयोग से पर्यावरण भी बहुत ज्यादा प्रदूषित होता है | इसलिए हमें अनवीकणीय स्रोतों का संरक्षण करना चाहिए और नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए |




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